"कल से भजन करूँगा..."
"कल से बदलूँगा..."
"कल से भगवान् को समय दूँगा..."
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज बताते हैं कि 'कल' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीव का सबसे बड़ा भ्रम है। कोई नहीं जानता कि अगला क्षण मिले न मिले। फिर भी हम अपने आध्यात्मिक अभ्यास को टालते रहते हैं।
इस एपिसोड में जानिए—
श्री महाराज जी के अमूल्य दोहों का गहन अर्थ
वेद और महाभारत की चेतावनी
संसार में रहते हुए भी आसक्ति से मुक्त रहने का मार्ग
भगवान् ही हमारे एकमात्र शाश्वत सम्बन्धी क्यों हैं
इस एपिसोड में पुस्तक 'कृपालु भक्ति धारा' के एक झकझोर देने वाले दोहे और 'प्रेम रस मदिरा' के एक सैद्धान्तिक पद के माध्यम से जीवन का ऐसा सत्य समझाया गया है, जो हमें जागने पर विवश कर सकता है।
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राधे राधे। 🌸
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